साध्वी आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी ने जुर्स कंट्री में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए जीवन की नश्वरता पर प्रकाश डाला

जैन समाज की प्रतिष्ठित साध्वी आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी का आज कोर कॉलेज से विहार कर पतंजलि योगपीठ होते हुए जुर्स कंट्री (Jurs Country) में मंगल आगमन हुआ। पतंजलि आगमन पर योग ऋषि स्वामी रामदेव जी एवं आचार्य बालकृष्ण जी ने माताजी का भावभीना स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

जीवन में कर्मों का सुधार आवश्यक: पूर्णमति माताजी

जुर्स कंट्री में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए माताजी ने जीवन की नश्वरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “मनुष्य जीवन भर उन वस्तुओं को एकत्र करने में लगा रहता है जो अंततः निरर्थक हैं। मृत्यु के पश्चात कुछ भी साथ नहीं जाता, यदि कुछ साथ जाता है तो वह हैं हमारे कर्म। इसलिए भौतिक वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय अपने कर्मों को सुधारने की नितांत आवश्यकता है।”

ऋषभदेव की तपस्थली में ‘समवशरण’ की प्रेरणा
माताजी ने हरिद्वार की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की तपस्थली रही है। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि वर्तमान में यहाँ उन प्राचीन स्मृतियों का कोई स्पष्ट चिह्न शेष नहीं है। उन्होंने प्रेरणा दी कि यहाँ एक भव्य ‘समवशरण’ की रचना होनी चाहिए, ताकि भावी पीढ़ियाँ इस पवित्र इतिहास से जुड़ सकें।

5 मार्च से ‘भक्तामर विधान’ का आयोजन
धर्मसभा के दौरान आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए बताया गया कि माताजी के पावन सानिध्य में 5 मार्च से 12 मार्च के मध्य प्रेम नगर आश्रम में एक भव्य भक्तामर विधान आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस पुण्य अवसर पर सहभागी बनने का आह्वान किया।

श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति

इस मंगल अवसर पर मुख्य रूप से श्री यू.सी. जैन सपरिवार, श्री संदीप जैन (एक्कमस) सपरिवार, बालेश जैन, निर्मल जैन, सतीश जैन, विजय जैन, संदीप जैन (ओमेगा), रवि जैन, समर्थ जैन, पीयूष जैन, नितेश जैन, आदेश जैन, ओमकार जैन और विजय जैन (ज्वालापुर) सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन अरविंद शास्त्री द्वारा किया गया। जुर्स कंट्री पहुँचने पर स्थानीय निवासियों और जैन समाज के प्रतिनिधियों ने माताजी की भव्य अगवानी की।

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