भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता,भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता

भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक, भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति

भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह अब तक का भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के साथ हुआ यह करार भारतीय व्यवसायों के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक का द्वार खोलता है, जिससे भारत–यूरोप व्यापार को नई गति मिलेगी।

डॉ. बंसल ने कहा कि यूरोपीय संघ के देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। ऐसे में इस समझौते का प्रभाव न केवल भारत और यूरोप, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारतीय उत्पादों को नया और बड़ा बाजार मिलेगा, जिससे व्यापार और निवेश की अपार संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि 16वां भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन उस ऐतिहासिक आयोजन के रूप में याद किया जाएगा, जहां दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने वैश्विक व्यापार में नया अध्याय शुरू किया।

डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि भारत वर्ष 2007 से इस समझौते के लिए प्रयास कर रहा था, लेकिन 2013 में यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह समझौता न केवल साकार हुआ, बल्कि विश्व की आर्थिक और सामाजिक दिशा को प्रभावित करने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगा। बीते वर्षों में भारत द्वारा लगातार मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ी है और निर्यात को मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि जी-20 सम्मेलन 2022 के दौरान अफ्रीकी देशों को संगठित कर अफ्रीकन यूनियन को प्रमुखता देना और अब 27 यूरोपीय देशों की अध्यक्ष को भारत आमंत्रित कर यह व्यापार समझौता करना, प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी सोच और सशक्त विदेश नीति का उदाहरण है।

डॉ. बंसल ने बताया कि यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी इस समझौते को अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण व्यापारिक करार बताया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत और यूरोप के बीच तकनीकी सहयोग और मजबूत होगा। डॉ. नरेश बंसल के अनुसार, इस समझौते से 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय वस्तुओं को तरजीही पहुंच मिलेगी, जिससे लगभग 6.41 लाख करोड़ रुपये के निर्यात अवसर सृजित होंगे। एमएसएमई, ऊर्जा, पेट्रो-गैस, समुद्री, रक्षा और निर्माण क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा। साथ ही वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए भी नए बाजार खुलेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत की सप्लाई चेन को और सशक्त करेगा और आत्मनिर्भर भारत से आगे बढ़ते हुए देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देगा। अंत में डॉ. बंसल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस दूरगामी पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर भारत की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।

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