राघव चढ्ढा ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा फीस को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि एक सरकारी नौकरी के लिए लाखों अभ्यर्थियों से परीक्षा फीस ली जाती है, लेकिन पद बहुत कम होते हैं। ऐसे में अगर सरकार पर्याप्त नौकरियां नहीं दे पा रही है, तो अभ्यर्थियों से ली गई फीस को रिफंड करने पर विचार क्यों नहीं किया जाता?
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार छात्रों की फीस से अपना खर्च चला रही है? इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे युवाओं और बेरोजगार छात्रों की आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक मुद्दा मान रहे हैं।मामला अब “नौकरी नहीं तो फीस रिफंड” की मांग के साथ चर्चा का विषय बना हुआ है।
